ए के सती
उत्तराखंड , श्री हेमकुंड साहिब को श्री गुरु गोविंद सिंह जी के पूर्व जन्म की तपस्थली माना जाता है। सिखों का यह पवित्र स्थान उत्तराखंड के चमौली जिले में है। इसकी ऊंचाई 15200 फीट है। यहां पर 6 महीने तक बर्फ जमी रहती है। यहां पवित्र यात्रा को शुरू करने से पहले करीब डेढ़ महीने तक फौज के जवान बर्फ काटकर रास्ता बनाते हैं। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे की पवित्र यात्रा 2 सितंबर से शुरू होने जा रही है। गुरुद्वारे पर पहली अरदास 4 सितंबर को होगी। यह यात्रा हर साल मई से अक्टूबर तक होती थी, लेकिन इस साल कोरोना की वजह से यात्रा तय समय पर शुरू नहीं हो सकी थी।

बुधवार को उत्तराखंड सरकार और श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट की बातचीत में यात्रा पर सहमति बनी। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने यात्रा की अनुमति दे दी है।श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रधान मनिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि उत्तराखंड सरकार की ओर से 4 सितंबर से दर्शन की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को उत्तराखंड में प्रवेश करने से दो दिन पहले कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट साथ लाना होगी। इसके अलावा यात्रा में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को आने की अनुमति नहीं है। यात्रा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखना होगा। गुरूद्वारा श्री गोविंद घाट के मैनेजर सेवा सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से अनुमति का इंतजार किया जा रहा था। यात्रा के रास्ता पूरी तरह से तैयार है। इस बार घोड़े और खच्चर वालों की कमी है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर कोई गलत रिपोर्ट लेकर यात्रा पर आएगा, तो उसे सरकार की ओर से उसी समय क्वारैंटाइन किया जा सकता है।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब साहिब ऋषिकेष के मैनेजर दर्शन सिंह ने बताया कि यात्रा को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं का सबसे पहले ऋषिकेष में रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण यात्रा के दौरान नियमों को कड़ा किया गया है। यात्रा पर आने से दो दिन पहले की कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए। इसके बाद उत्तराखंड सरकार के पास यात्रा को लेकर आवेदन करना होगा। इसके बाद ई-पास जारी किया जाएगा। इसके बाद ही यात्रा में शामिल हो सकेंगे।यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार के पोर्टल पर अप्लाई करना होगा। इसके बाद ई-पास जारी किया जाएगा। उसके बाद ही यात्रा में शामिल हो सकते हैं। बिना ई-पास के आने पर उत्तराखंड सरकार की ओर से कभी भी क्वारैंटाइन किया जा सकता है। इसके अलावा यात्रा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखना होगा।

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