बॉलिवुड में 13 साल के अपने फिल्मी करियर के बाद अब मिनीषा लांबा थिएटर में अपनी नई पारी शुरू करने जा रही हैं। मिरर मिरर नाम का यह प्ले मुंबई में प्रस्तुत होगा। इसमें मिनीषा के 13 किरदार देखने को मिलेंगे। नाटक की कहानी दो जुड़वां बहनों मीनल और मान्या की तकरार पर आधारित है। पढि़ए प्ले के लिए दिल्ली आईं मिनीषा से खास बातचीत के अंश:
लोग थिएटर से मूवी में जाते हैं, आप मूवी और टीवी करके थिएटर में डेब्यू कर रही हैं, ऐसा क्यों? सबसे ज्यादा चैलेंजिंग क्या लगा?
दरअसल अभी तक मुझे थिएटर में काम करने का मौका नहीं मिला। ये वक्त वक्त की बात होती है। मैं टीवी भी कर रही हूं, थिएटर भी कर रही हूं। थिएटर में भी काम करके मुझे मजा आ रहा है और टीवी सीरियल्स में काम करके मैं बहुत खुश हूं। तीनों में काम करना चैलेंजिंग होता है। तीनों के अपने अपने ऑडियंस हैं। आजकल लोग टीवी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। टीवी के पास बड़ा दर्शक वर्ग है, लेकिन इस बात को लोग समझते नहीं है। जो सबसे बड़े स्टार्स की सबसे बड़ी फिल्में होती हैं उन फिल्मों की ही पहुंच सबसे ज्यादा होती है, लेकिन टीवी की पहुंच घर घर में है। इसलिए टीवी के व्यापक दायरे से इनकार नहीं किया जा सकता है। थिएटर में ये एक्टर की जिम्मेदारी होती है कि शो खत्म होने के बाद जब लोग वापस जा रहे हों तो उनको लगना चाहिए कि पैसा वसूल हुआ है। शुरू में मैं बहुत डरी हुई थी, मेरे लिए ये बिल्कुल नया मीडियम था। डर का एक कारण ये भी था कि इस प्ले में मैं ही इकलौती किरदार थी। कोई दूसरा किरदार नहीं था। हालांकि सैफ सर हमेशा साथ होते थे। जब भी मैं उनसे कुछ कहती तो वह कहते कि सब हो जाएगा, डोंट वरी।
प्ले में अपने किरदार के बारे में बताइए? एक साथ 13 कैरेक्टर प्ले करना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
यह एक सोलो प्ले है, मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मेरे पहले ही प्ले में मुझे इतना बड़ा मंच मिला है। मैं इसे अपने लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी मानती हूं। ये दो जुड़वा बहनों की आपसी तकरार पर आधारित प्ले है, जिसमें मैंने 13 कैरेक्टर प्ले किए हैं। मैं भी अपने भाई के साथ खूब लड़ती झगड़ती रहती थी। मुझे लगता है कि हर भाई बहन के पास आपस में लड़ाई झगड़े की ढेर सारी कहानी होती हैं। मैने बचपन में अपने भाई को मुक्का मारकर उसका दांत तोड़ दिया था, जिसके बाद मुझे भी मम्मी से मार पड़ी थी। लेकिन प्ले में मैं जो किरदार निभा रही हूं वह बहुत ही डार्क कैरेक्टर है। मुझे नहीं मालूम कि ये कितना चुनौतीपूर्ण था और कितना नहीं, क्योंकि मेरा काम परफॉर्म करना है। परफार्मेंस कैसा रहा ये ऑडियंस बताती है। थिएटर में लोग परफार्मेंस के अनुसार कमियां भी बताते हैं और तारीफ भी करते हैं।
आप मिरांडा हाउस की स्टूडेंट रह चुकी हैं, अब तक कितना बदलाव आ गया है?
आज के समय में और तब के समय में जमीन आसमान का अंतर है। हालांकि आज भी कैंपस उतना ही खूबसूरत है जितना तब था। यहां का ऑडिटोरियम काफी बदल चुका है। मैं अपने टीचर्स को कभी नहीं भूल सकती। हमारी इंग्लिश टीचर ने हमें काफी मोटिवेट किया था। वह कहती थीं कि तुम अपने आपको पहचानो और एक लक्ष्य तय करो कि क्या करना चाहती हो। आज हमारी एक अलग पहचान है तो इसमें उनका बड़ा योगदान है।
आप बिग बॉस के घर में रह चुकी हैं, घर के अंदर के माहौल के बारे में बताइए। ये भी आरोप लगते रहे हैं कि वहां हो रही चीजें प्री प्लान्ड होती हैं, क्या ये सच है?
बिग बॉस में एक घंटे में जो दिखाते हैं वह पूरे दिन का निचोड़ होता है कि पूरे दिन में क्या क्या हुआ है। इसलिए बाहर के लोगों को वहां अंदर क्या क्या चल रहा है, पूरी तरह पता नहीं चल पाता है। वहां सबसे बड़ी चीज ये होती है कि इंसान बोर हो जाता है। पूरा दिन आप लोगों के साथ कितनी बातें करेंगे, कितना खाना पकाएंगे, कितना वर्कआउट करोगे। आपके पास फोन नहीं है, टीवी नहीं है, किताब नहीं है, यहां तक कि कागज और कलम भी नहीं है। इंसान करे तो क्या करें। वहां वक्त काटना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसीलिए बोर होकर लोग छोटी छोटी बातों पर बवाल करने लगते हैं। अगर प्री प्लान्ड होता या स्क्रिप्टेड होता तो ये 12वां सीजन चल रहा है और बात बाहर आ गई होती। अगर सच होता तो कुछ तो सबूत मिलता, 12 साल के बाद भी अगर लोगों के पास सबूत नहीं है तो मतलब यही है कि ऐसा कुछ नहीं है। हर इंसान चाहता है कि लोग उसे नोटिस करें और इसीलिए वहां वे तरह तरह की एक्टिविटी करते रहते हैं।
इस समय वेब सीरिज तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इसे आप किस तरह से देखती हैं?
मौका मिलता है तो मैं वेब सीरिज जरूर करूंगी। मुझे लगता है कि बहुत सारे मेकर्स के पास बहुत सी अच्छी स्क्रिप्ट पड़ी हैं, जिन पर वे कई कारणों से फिल्म नहीं बना सकते है लेकिन वेब सीरिज बनाने का उनके पास मौका है। कुछ समय बाद वेब सीरिज आसानी से टीवी को रिप्लेस कर सकता है।
आपने करियर में तमाम उतार चढ़ाव देखे हैं, कौन सी चीज आपको हमेशा प्रेरित करती रही?
आप सीखते हो जब आपकी फिल्में नहीं चलती है, लोग फोन कॉल्स उठाना बंद कर देते हैं। कॉलेज से निकलने के बाद लाइफ सिखाती है। असफलताओं की ठोकर लगती है उससे आप सीखते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here