पंचकूला, 7 अप्रैल- हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के प्रयास से पंचकूला जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-73 पर बतौड़ गांव में आर्मी नर्सिंग कॉलेज के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस कॉलेज का संचालन भारतीय सेना के पश्चिम कमान मुख्यालय द्वारा किया जाएगा। नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए ज्ञान चंद गुप्ता लंबे अरसे से प्रयासरत थे। इसके लिए वे पहले प्रदेश सरकार से 10 एकड़ भूमि आवंटित करवा चुके हैं। सोमवार को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से विशेष मुलाकात कर उन्होंने रक्षा मंत्रालय से यह आर्मी नर्सिंग कॉलेज का निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाने का आग्रह किया। इसके साथ ही गुप्ता ने रक्षा मंत्री से पिंजौर में एचएमटी की भूमि पर रक्षा उपकरण उद्योग की भी मांग की।
बतौड़ गांव में जहां आर्मी नर्सिंग कॉलेज खुलेगा वह स्थान चंडीमंदिर स्थित पश्चिमी कमान के मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर है। यह 80 फुट चैड़े राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है। यहां नर्सिंग कॉलेज बनाने के लिए ज्ञानचंद गुप्ता के प्रयासों से प्रदेश सरकार ने भूमि उपलब्ध करवाई थी। वर्ष 2019 के फरवरी माह में प्रदेश सरकार ने यह भूमि पश्चिमी कमान मुख्यालय को सौंप दी थी, लेकिन धन के अभाव में कॉलेज का निर्माण नहीं किया जा सका। अब ज्ञानचंद गुप्ता ने रक्षामंत्री राजनाथ से आग्रह कर इसके लिए जल्द अनुदान जारी करवाने की मांग की है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री से मुलाकात के दौरान हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने पिंजौर स्थित एचएमटी की जमीन पर रक्षा विनिर्माण उद्योग स्थापित करने की मांग भी की। इस दौरान रक्षा मंत्री और विधान सभा अध्यक्ष के बीच रक्षा विनिर्माण उद्योग और डिफेंस पार्क पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ है। गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि परियोजना के सिरे चढ़ने पर पंचकूला की पहचान की हेलिकॉप्टर और हवाई जहाजों के एसेंबलिंग हब के रूप में स्थापित होगी। इसके साथ ही रक्षा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का अध्याय भी शुरू हो जाएगा।
उन्होंने पिंजौर में प्रस्तावित रक्षा विनिर्माण उद्योग की व्यावहारिकता और उपयोगिता पर विस्तृत ब्योरा दिया। गुप्ता ने बताया कि भारी नुकसान के कारण बंद हुई एचएमटी इकाई की लगभग 800 एकड़ भूमि का समुचित सदुपयोग हो सकेगा। इसके अलावा अंबाला-कालका-शिमला और लद्दाख के राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण इस स्थान का रणनीतिक महत्व भी है।
गुप्ता ने बताया कि भारतीय सेना के पश्चिमी कमान का मुख्यालय चंडीमंदिर भी पास लगता है। इसके साथ ही पंचकूला में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ’बेल’ के अलावा रामगढ़ में डीआरडीओ संस्थान, भानु पंचकूला स्थित इंडो तिब्बती सीमा पुलिस बल का बेसिक ट्रेनिंग सेंटर बीटीसी, पिंजौर में सीआरपीएफ का डीआईजी कार्यालय ऐसे प्रतिष्ठान हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सशस्त्र बलों और रक्षा के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र चंडीगढ़ पीजीआई, पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थानों से भी घिरा हुआ है। इनसे भी सीधी मदद मिलेगी। आईआईटी रोपड़ और बड़ी संख्या में निजी इंजीनियरिंग कॉलेज भी चंडीगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं।
ज्ञानचंद गुप्ता ने यह भी तर्क पेश किया कि निर्माण पर अधिक जोर होने के अगले 10 वर्षों में ’मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के माध्यम से साथ भारत का पूंजीगत व्यय 200 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के ’मेक इन इंडिया’ और ’आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा देने के लिए रक्षात्मक प्रक्रियाओं को संस्थागत बनाने, सुव्यवस्थित और सरल बनाने, स्वदेशी डिजाइन, प्लेटफॉर्म, सिस्टम के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्था की गई है। गुप्ता ने रक्षा मंत्री को यह भी याद दिलाया कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा गलियारे स्थापित कर रही है। पंचकूला का यह प्रस्तावित स्थान यूपी गलियारे के करीब है। इस कारण यह केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजना में भी सहयोगी बनेगा।
देश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी के अलावा यह स्थान बहुत ही प्रमुख है। यह हिमाचल प्रदेश लद्दाख और पश्चिमी उत्तराखंड का प्रवेश द्वार है। इस सुविधा का मुख्य रूप से उत्तर और पश्चिमी भारतीय सीमाओं में सक्रिय रक्षा उपकरणों के रखरखाव मरम्मत और सेवा की जरूरतों को पूरा करने के लिए रणनीतिक लाभ होगा।

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