मुंबई ,26 मई। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी ने गुजरात में जीआईएफटी सिटी को एक ऐसे फाइनेंशियल सेंटर में बदलने का पहला कदम उठा लिया है, जो ग्लोबल फंड्स को मॉरीशस और सिंगापुर से अपना बेस शिफ्ट करने के लिए आकर्षित कर सकता है। सेबी ने इंटरनेशनल फंड्स को एनएसई, बीएसई और दूसरे भारतीय एक्सचेंजों पर लिस्टेड शेयरों में ट्रेड करने
के लिए जीआईएफटी में इनवेस्टमेंट पूलिंग की इजाजत दी है।
जीआईएफटी सिटी के सीईओ अजय पांडेय ने कहा, सही अर्थों में देखा जाए तो इससे दुबई और सिंगापुर जैसी जगहों से काफी बिजनेस आएगा और रोजगार के मौके भी बनेंगे। जीआईएफटी आईएफएससी बनाने के मकसद में यह बात भी शामिल थी।
सेबी के लेटर के मुताबिक, जीआईएफटी के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर से काम करने वाले पोर्टफोलियो मैनेजरों, ऑल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स और म्यूचुअल फंड्स को इंडिया में बनाई गई कंपनियों की ओर से जारी सिक्योरिटीज में निवेश करने की इजाजत होगी, बशर्ते इस संबंध में आरबीआई या भारत सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देंशों के मुताबिक काम किया जाए। इन गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा निवेश एफपीआई रूट से किया जाना चाहिए।
लॉ फर्म निशीथ देसाई एसोसिएट्स के फाउंडर निशीथ देसाई ने कहा, इसमें इंडियन मार्केट्स का दमखम बढ़ाने की क्षमता है। उम्मीद है कि आरबीआई और सरकार की गाइडलाइंस इसके मकसद के मुताबिक होंगी। पीडब्ल्यूसी के पार्टनर भावीन शाह के मुताबिक, ताजा कदम से सिंगापुर और मॉरीशस के पब्लिक मार्केट फंड्स के मैनेजरों को यहां अपना बेस बनाने और वहां से इंडियन सिक्योरिटीज में निवेश करने में सहूलियत होनी चाहिए।
गुजरात से कामकाज करने की लागत सिंगापुर के मुकाबले काफी कम होगी, लेकिन इंटरनेशनल इनवेस्टर्स और फंड्स वहां अपना बेस टैक्स सिस्टम का मूल्यांकन करने के बाद ही बनाएंगे। इंडियन फाइनेंशियल मार्केट्स के गेटवे के रूप में मॉरीशस का आकर्षण भारत के साथ उसकी टैक्स ट्रीटी में बदलाव के साथ घट गया है। सालभर बाद मॉरीशस के निवेशकों को भी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स चुकाना होगा।
आईसी लीगल के पार्टनर तेजेश चितलांगी ने कहा, सेबी के सर्कुलर ने उन सिक्योरिटीज का दायरा बढ़ा दिया है, जिनमें आईएफएससी से ऑपरेट करने वाले पोर्टफोलियो मैनेजर, एआईएफ या एमएफ निवेश कर सकते हैं। ऐसे निवेश को एफपीआई रूट के तहत भी लाया गया है। इसका अर्थ यह है कि ऐस इकाइयों को सेबी की एफपीआई गाइडलाइंस के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा और सेबी के एफपीआई रेगुलेशंस और एक्सचेंज कंट्रोल लॉज में उपयुक्त संशोधन भी करने होंगे।
निवेशकों ने यह सुझाव भी दिया है कि जीआईएफटी को एक संपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ट्रेडर्स को सीएमई जैसे इंटरनेशनल एक्सचेंजों तक एक्सेस और आर्बिट्राज डील्स करने की इजाजत दी जानी चाहिए। यह भी कहा गया है कि डोमेस्टिक इंडिविजुअल इनवेस्टर्स को जीआईएफटी आईएफएससी में एक्सचेंजों पर लिबरलाइज्ड रेमिटेंस विंडो के जरिए दांव लगाने दिया जाना चाहिए। हालांकि इंडियन रेगुलेटर्स ने अभी इनकी इजाजत नहीं दी है।

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