देश में अब तक हिंदी को भले ही राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल पाया हो, लेकिन गैर हिंदी भाषियों में हिंदी सीखने और जानने की ललक बढ़ी है। यह बात केंद्रीय हिंदी निदेशालय और बिड़ला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दस दिवसीय हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखक शिविर में सामने आई है। इस शिविर में तमिलनाडु, केरल, गुजरात सहित कई प्रदेश से शोधार्थी आए हैं। इन शोधार्थियों के मुताबिक हिंदी एक समृद्ध भाषा है। यह रोजगार परक भाषा बन गई है और जब दुनियाभर के कई विश्वविद्यालयों में यह भाषा पढ़ाई जाती है, तब इस भाषा को सर्व सम्मति से राष्ट्रभाषा घोषित कर देना चाहिए। इस शिविर में नवलेखकों को हिंदी भाषा और साहित्य के विविध पक्षों में लेखन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर में अब तक गैर हिंदी भाषी नवलेखकों को अलग-अलग विधाओं पर दिल्ली के डॉ. ब्रजेंद्र तिवारी, अहमद नगर के प्राध्यापक पुरुषोत्तम कुंदे, डॉ. रामजी तिवारी, सुशीला गुप्ता, सूर्यबाला, डॉ. विजय कुमार, सतीश पांडेय, डॉ. बालकवि सुरंजे, डॉ. श्यामसुंदर पांडेय आदि ने मार्गदर्शन किया। शिविर प्रभारी और केंद्रीय हिंदी निदेशालय से संबद्ध डॉ. रत्नेश कुमार मिश्र ने कहा कि शिविर में देश के विभिन्न हिस्से लोग आए हैं।

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