नई दिल्ली। मंगलवार को एयरफोर्स के 15 फाइटर प्लेन्स का लखनउ आगरा एक्सप्रेश-वे पर बडर टचडाउन हुआ , जिसको देखने के लिए लोगों की भीड उमड पडी। याद दिलाते चलें कि यह दुसरा मौका है जब एक्सप्रेश-वे पर फाइटर प्लेन ने लैंड किया हो , इसके पहले पिछले साल 21 नवंबर को टचडाउन हुआ था।
जानकारी के अनुसार सबसे पहले कैरियर एयरक्राफ्ट सुपर हरक्यूलिस की लैंडिंग हुई। इससे गरुड़ कमांडो एक्सप्रेस-वे पर उतरे। इसके बाद ६ मिराज-२०००, ६ सुखोई-३० और ३ जगुआर फाइटर जेट ने टचडाउन किया। हरक्यूलिस ने गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से उड़ान भरी थी। एक्सप्रेस वे पर लैंडिंग के बाद इसमें से गरुड़ कमांडो उतरे। हरक्यूलिस ने २ बार टचडाउन किया। मिराज ने ग्वालियर बेस तो जगुआर ने गोरखपुर बेस से उड़ान भरी थी। सुखोई-३०रू्यढ्ढ ने बरेली से उड़ान भरी।
रक्षा मंत्रालय की पीआरओ गार्गी मालिक ने बताया कि ३.२ किमी के रनवे पर ये कोई एयर शो नहीं बल्कि यह एयरफोर्स का ऑपरेशन था।
एक्सप्रेस-वे पर एयर स्ट्रिप क्यों ?
जंग के दौरान सबसे पहले हवाई हमले एयरबेस और एयरपोर्ट पर ही किए जाते हैं, ताकि फाइटर प्लेन उड़ान न भर सकें। ऐसे में, एक्सप्रेस-वे पर बनी एयर स्ट्रिप ही फाइटर प्लेन के लैंड करने और टेकऑफ करने के काम आ सकती है। इसी का ध्यान रखते हुए एयरफोर्स चाहती थी कि देश में स्ट्रैटजिकल इम्पॉर्टेंस वाले हाईवे पर एयर स्ट्रिप बनाई जाएं।
यह क्षेत्र चीन (डोकलाम बॉर्डर) और पाकिस्तान (राजस्थान से लगे बॉर्डर) की मिसाइल रेंज से बाहर है। लिहाजा जंग के दौरान फाइटर प्लेन एक्सप्रेस वे से टेकऑफ-लैंडिंग कर सकेंगे।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे कुल ३०२ किमी का है , इसमें ६ लेन हैं। इस एयर स्ट्रिप की लंबाई ३.२ किमी है।

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